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Pegasus Kya Hai | पेगासस के जरिए कैसे जासूसी होती हैं। जानिए पूरी जानकारी।

Pegasus Kya Hai : वर्तमान मे अभी एक मुद्दा ट्रेंड मे है जिसका नाम है पेगासस स्पायवेयर जिसको लेकर एक संयुक्त रिपोर्ट मे दावा किया गया है कि भारत सरकार दो से तीन वर्षों मे तकरीबन 200 से 300 मोबाइल नंबर की जासूसी करवा रही है जिसमे जर्नलिस्ट , वकील सोशल वर्कर , विपक्षी नेता बिजनस के नंबर शामिल है।

इस लेख मे हम आपको इसी सॉफ्टवेयर के बारे मे विस्तार से जानकारी देने वाले है, कि पेगासस स्पायवेयर सॉफ्टवेयर क्या है ,इसका इस्तेमाल किसलिए किया जाता है।अगर आप भी इसके बारे मे पूरी जानकारी प्राप्त करना चाहते है तो लेख को अंत तक जरूर पढे।

इस जानकारी को हिन्दी की आसन से आसान भाषा में दोबारा लिखे

पेगासस क्या है? Pegasus Kya Hai

पेगासस एक स्पायवेयर सॉफ्टवेयर है जिसका मतलब होता है कि जासूसी करना या निगरानी करना। इस सॉफ्टवेयर को इजराइली साइबर सिक्योरिटी कंपनी एनएसओ ग्रुप के द्वारा डेवलप किया गया है।

स्पायवेयर सॉफ्टवेयर की मदद से किसी भी व्यक्ति का मोबाइल फोन या कोई भी इलेक्ट्रॉनिक गेजेट्स आसानी से हेक किया जा सकता है।
यूजर की डिवाइस हैक होने के बाद उसके मोबाइल का कनेक्शन हेकर्स से जुड़ जाता है। अब आपके मोबाइल मे केमरा, माइक, मेसेज काल इत्यादि जानकारी को हेकर ट्रेक करते रहते है।

इस सॉफ्टवेयर को किसी भी डिवाइस मे आसानी से गलत तरीके से इंस्टाल करवाया जा सकता है एक जानकारी के मुताबिक सिर्फ एक मिस काल के माध्यम से भी आप किसी भी यूजर के मोबाइल मे इस सॉफ्टवेयर को इंस्टाल करवा सकते हो।

फिर सोशल मीडिया, वॉट्सऐप मैसेज, टेक्स्ट मैसेज के माध्यम से भी हेकर्स आपके मोबाइल मे इसे इंस्टाल कर सकते है आपको इसकी भनक तक नहीं लगेगी और आपको जासूसी शुरू हो जायेगी।

पेगासस स्पाइवेयर सॉफ्टवेयर को और भी कई अलग अलग नामों से जाना जाता है जैसे कि क्यू सूट ,ट्राइडेंट क्यू साइबर टेक्नोलॉजिज

एक जानकारी के मुताबिक यह सॉफ्टवेयर दुनिया की सबसे सुरक्षित मानी जाने वाली डिवाइस एप्पल मे घुसपैठ कर सकता है

इस सॉफ्टवेयर को बनाने वाले एनएसओ ग्रुप ने अपनी ऑफिसियल वेबसाइट पर दावा किया है कि वह इस सॉफ्टवेययर की मदद से सरकारी एजेंसियों की मदद करने, आतंकवाद और अपराध को रोकने और देश की सुरक्षा से जुड़े मामलों पर ध्यान रखने के लिए करता है।\

पेगासस को कौन खरीद सकता है?

एक रिपोर्ट के अनुसार एनएसओ ग्रुप यह दावा करता है हम केवल किसी भी देश की अधिकृत सरकार के साथ भी काम करते है।

मेक्सिको और पनामा देश की सरकारे इस सॉफ्टवेयर का इस्तेमाल सार्वजनिक रूप से करती है वर्तमान मे इस पेगासस स्पायवेयर सॉफ्टवेयर के 40 देशों मे तकरीबन 60 से अधिक ग्राहक है।

जिसमे कंपनी के यूजर 51% इंटेलिजेंस एजेंसियों, 38% कानून प्रवर्तन एजेंसियों और 11% सेना से संबंध रखते है।

पेगासस सॉफ्टवेयर कंपनी का दावा है कि इस सॉफ्टवेयर का इस्तेमाल देश की सरकारी एजेंसियों को स्थानीय और वैश्विक खतरों के बारे मे पता लगाने और उसे रोकने मे मदद करता है।

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पेगासस स्पाइवेयर का खर्च

इस सॉफ्टवेयर क इस्तेमाल करना आसान नहीं है , न ही यह सॉफ्टवेयर हर किसी को मिल सकता है लेकिन जिस किसी के उपयोग के लिए इसी परमिशन दी गई है उन्हे इसे इस्तेमाल करने की भारी कीमत चुकनी पड़ती है।

पेगासस स्पाइवेयर सॉफ्टवेयर की कीमत क्या होगा ये एनएसओ ग्रुप और खरीदने वाले के बीच तय होती है जोकि करोड़ों रुपये प्रति एक यूजर के हिसाब से चार्ज की जाती है।

पेगासस के एक सॉफ्टवेयर के लाइसेंस की कीमत 70 लाख से 1 करोड़ के बीच होती है जिससे एक साथ दो से तीन डिवाइस को हेक किया जा सकता है।

2016 की एक रिपोर्ट के अनुसार इस सॉफ्टवेयर का इस्तेमाल करने के लिए एनएसओ ग्रुप
लगभग 10 करोड़ रुपये चार्ज करता था जिससे एक साथ 10 लोगों की डिवाइस को हेक किया जा सकता है।
यही नहीं इस सॉफ्टवेयर को इंस्टाल करने के लिए कंपनी अलग अलग से फीस भी चार्ज करती है जिसके लिए तकरीबन 500,000 डॉलर यानि कि 3.75 करोड़ रुपए लिए जाते है।

पेगासस काम कैसे करता है? ( Pegasus Kya Hai )

साइबर सेक्योरिटी एक्सपर्ट्स के अनुसार हेकर्स इस सॉफ्टवेयर को यूजर्स की डिवाइस मे इंस्टाल करने का कोई एक तरीका नहीं इस्तेमाल करते है वे इसे यूजर्स की डिवाइस की एक्टिविटी के हिसाब से अलग अलग तरीके अपनाते रहते है ऐसे मे यूजर को पता भी नहीं चलता और उनके मोबाइल मे पेगासस पहुच जाता है।

एक जानकारी के मुताबिक 2019 मे हेकर्स ने इस सॉफ्टवेर को व्हाट्सअप वीडियो काल
के माध्यम से यूजर्स की डिवाइस तक पहुचा दिया था ऐसे मे आप अंदाजा लगा सकते है कि यह सॉफ्टवेयर कितना खतरनाक है।

इस यूजर के मोबाइल मे इंस्टाल करवाने का एक तरीका भी यह सामने आया है कि इसमे हेकर्स जिस भी डिवाइस को टारगेट करना चाहते है उस डिवाइस मे मेसेज के माध्यम से एक “एक्सप्लॉइट लिंक” भेजी जाती है।

अगर यूजर्स गलती से भी एक बार इस लिंक पर क्लिक कर देता है तो पेगासस स्पाइवेयर खुद ही डिवाइस मे इंस्टाल हो जाता है जिसका पता यूजर को भी नहीं चलता है।

हेकर्स इसके लिए और भी तरीके इसतेंआल करते है जिनका मकसद होता है किसी न किसी तरह से एक बार यूजर्स के मोबाइल मे इस सॉफ्टवेयर को इंस्टाल करना होता है।

हेकर्स एंड्रॉइड डिवाइस मे Pegasus, Framaroot रूटिंग प्रोसेस का इस्तेमाल करते है जिसके माध्यम से हेकर्स यूजर्स की डिवाइस मे से सभी प्रकार का डेटा चुरा सकते है।

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पेगासस स्पाइवेयर खतरनाक क्यों है। ( Pegasus Kya Hai )

पेगासस स्पाइवेयर अगर किसी भी यूजर की डिवाइस मे मे इंस्टाल हो जाता है तो उसके बार यूजर्स के पास कोई ऐसा प्रूफ नहीं होता है जिससे वो पता लगा सके कि उसकी डिवाइस मे कोई मालवेयर या स्पाइवेयर इंस्टाल हो चुका है।

पेगासस स्पाइवेयर कम बैंडविड्थ पर भी डिवाइस को हेक कर सकता है यही नहीं ये अपना काम इतनी बारीकी से करता है कि फोन की बैटरी, मेमोरी और डेटा का भी ना के बराबर इस्तेमाल करता है ताकि किसी भी यूजर्स को किसी प्रकार का शक न हो।

एप्पल डिवाइस को दुनिया की सबसे सुरक्षित डिवाइस माना जाता है जिसे हेक करना किसी भी हेकर्स के लिए आसान नहीं होता है लेकिन हेकर्स पेगासस स्पाइवेयर की मदद से एप्पल की डिवाइस भी आसानी से हेक कर रहे है इसलिए एंड्रॉइड को हेक करना उनके लिए खेल है।

अगर आप अपनी डिवाइस पर लॉक लगाकर रखते है तब भी यह सॉफ्टवेयर अपना काम करता रहता है और यूजर्स की इनफॉर्मेशन ट्रेक करके हेकर्स तक पहुचाता रहता है।

पेगासस स्पाइवेयर से कैसे बचे

अगर आप खुद को इस सॉफ्टवेयर की ट्रेकिंग से बचाना चाहते है तो नीचे दिए कुछ टिप्स के बारे मे जरूर जान ले।

आप अपनी डिवाइस को समय समय पर अपडेट करते है ऐसे मे अगर आपकी डिवाइस मे किसी भी प्रकार का कोई मालवेयर या स्पाइवेयर होगा तो अपडेट होने के बाद रिमूव हो जायेगा।

अगर आप चाहते है कि आपकी डिवाइस खुद ही औटोमेटिक अपडेट होती रहे है तो आप सेटिंग मे जाकर औटोमेटिक अपडेट के ऑप्शन मे जाकर उसे एक्टिव कर दे।

अगर आपकी डिवाइस काफी पुरानी है लगभग 5 वर्ष पुरानी तो ऐसी डिवाइस के हेक होने का जोखिम ज्यादा रहता है खासतौर पर जब वे पुराने ऑपरेटिंग सिस्टम पर काम करती है।

इसलिए अगर आपकी डिवाइस का डेटा महत्वपूर्ण है या आप उसे अपने बिजनस के लिए करते है तो उसे ज्यादा पुरानी न होने दे नहीं तो आपका कीमती डेटा ट्रेक हो सकता है जो किसी भी डिवाइस से ज्यादा कीमती होता है।

अगर आपकी डिवाइस मे अलग अलग ऐप पर पासवर्ड लगाने का फीचर है, तो उसे जरूर इस्तेमाल करे क्योंकि डिवाइस बनाने वाली कंपनिया यूजर्स से आगे का सोचकर तभी किसी फीचर को जोड़ती है ताकि उनका सही इस्तेमाल किया जा सके।

अगर आप अपनी डिवाइस मे पासवर्ड का इस्तेमाल कर रहे है तो उसमे मजबूत पासवर्ड बनाए पासवर्ड बनाते समय किसी का नाम , जन्मतिथि या किसी पालतू एनिमल के नाम का इस्तेमाल न करे।

डिवाइस के जिस भी ऐप या फीचर मे जहा पर संभव हो टू स्टेप ऑथेंटिकेशन को ऑन कर दे।

अपनी डिवाइस मे अगर आपको किसी भी स्थान पर किसी प्रकार का अनजान लिंक दिखाई देता है तो उस पर भूलकर भी क्लिक न करे हो सके तो दिखाई देते ही उसे तुरंत डिलीट कर दे।

अपनी डिवाइस मे डिसअपियरिंग सेटिंग को एक्टिवेट कर दें, ताकि आपके पास आने वाले मेसेज एक समय के बाद खुद ही डिलीट हो जाए।

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पेगासस स्पाइवेयर से क्या ट्रेक होता है

पेगासस स्पाइवेयर डिवाइस मे इंस्टाल होने के बाद हेकर्स को आपकी डिवाइस की कमांड एंड कंट्रोल सर्वर इन्सट्रक्शन देता रहता है।

यूजर्स की डिवाइस मे मौजूद सभी प्रकार का डेटा जैसे कि कॉन्टेक्ट नंबर , लोकेशन , कालस पीडीएफ फ़ाइल , डॉक्स फ़ाइल इत्यादि को हेकर्स ट्रेक करते रहते है।

पेगासस के जरिए हेकर्स यूजर्स की डिवाइस का कैमरा और माइक भी ऑन कर सकते है ताकि यूजर्स जब भी काल या वीडियो काल करेगा तो वे उसे भी ट्रेक कर सकते है।

कुल मिलकर कहा जाए तो पेगासस इंस्टाल होने के बाद हेकर्स यूजर्स की डिवाइस को अपनी जरूरत के अनुसार कभी भी किसी भी फ़ाइल को निकाल कर उसका इस्तेमाल कर सकते है।

निष्कर्ष- Pegasus Kya Hai

इस लेख मे हमने आपको पेगासस स्पाइवेयर के बारे मे विस्तार से जानकारी दी है कि कि इसकी मदद से कोई भी हेकर्स किसी भी डिवाइस को किस प्रकार आसानी से ट्रेक कर सकता है।

इस लेख मे हमने आपको बताया है कि पेगासस स्पाइवेयर क्या है ( Pegasus Kya Hai ) और यह यूजर्स के लिए कितना खतरनाक है अगर आपको हमारी ये जानकारी पसंद आई है तो आप अपनी राय हमे कमेन्ट बॉक्स मे जरूर बताए और इस जानकारी को दूसरे यूजर्स के साथ भी जरूर शेयर करे ताकि उन्हे भी इसके बारे मे पता चल सके धन्यवाद

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