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Deep Learning Kya Hai | डीप लर्निंग टेक्नोलॉजी क्या है ? यह कैसे काम करती हैं।

Deep Learning Kya Hai : रेड लाइट चौराहे पर कोई ट्रैफिक पुलिस वाला नहीं रहता है। इसलिए ड्राइविंग करने वालो को चालान कटने का डर भी नहीं रहता है।

इसलिए आप ट्रैफिक रूल को तोड़ते हुए आगे बढ़ जाते हो और आपको अपनी गलती का अहसास भी नहीं रहता है कि आपके ट्रैफिक के कितने नियमों का उल्लंघन किया है। आप हैरान तब रह जाते है। जब ट्रैफिक नियमों के उल्लंघन की वजह से चालान आपके घर पहुंच जाता है।

अब सोचने लगते हो कि ये कैसा हुए जब वँहा पर कोई पुलिस वाला नहीं था, तो मेरे चालान किसने काटा। ये चालान ऐसे भी नहीं होते है, जो सस्ते में देकर निपट जाये। आपको चालान की पूरी रकम भरनी पड़ती है।

अब ऐसा सोचने वाले सिर्फ आप ही नहीं है। आपके जैसा सोचने वाले लाखों लोग होते है जिन्हे यही नहीं पता कि ये किस प्रकार होता है।

आज हम आपको इस लेख में इसी टेक्नोलॉजी के बारे में संपूर्ण जानकारी देने वाले है कि ऐसा किस प्रकार होता है, कि बिना ट्रैफिक पुलिस वाले के बिना चालान आपके घर आ जाता है।

इस टेक्नोलॉजी का नाम है। डीप लर्निंग, इस लेख में हम आपको बताने वाले है कि डीप लर्निंग तकनीक क्या है ? Deep Learning Kya Hai , Deep Learning Technology Hindi मशीन लर्निंग टेक्नोलॉजी क्या है ? Machine Learning Technology Kya Hai इत्यादि

डीप लर्निंग टेक्नोलॉजी क्या है Deep Learning Kya Hai

बदलते समय के अनुसार टेक्नोलॉजी भी लगातार तेजी से बढ़ती जा रही है इसने लोगो के काम करने के तरीकों को भी काफी आसान बना दिया है। यही कारण है बिना ट्रैफिक पुलिस के चालान आपके घर पहुंच जाता है। आपने सभी रेड लाइटों पर सीसीटीवी कैमरे लगे हुए देखे होंगे।

ऐसे मामलों पर जिस भी पर्सन का चालान काटना हो सबसे पहले उस पर्सन की सीसीटीवी फुटेज के आधार पर मशीन द्वारा सबसे पहले गाडी का नंबर नोट कर लिया जाता है, और फिर वाहन मालिक का नाम और एड्रेस पता लगाकर चालान उसके घर पर भेज दिया जाता है। सबूत के तौर वाहन मालिक को चालान के साथ उस फोटो को भी भेजा जाता है। जिसके कारण उसका चालान कटा है।

इस कार्य को आसान बनाने के लिए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानि कि एआई सिस्टम की अहम भूमिका होती है। जिसके लिए उसे खास ट्रेनिंग दी जाती है।

किसी भी कार्य को करने के लिए मशीनों की जरूरत होती है ऐसे में मशीनों को ट्रेनिंग देकर तैयार करना ही डीप लर्निंग के अंतर्गत आता है।

हम मशीनों को जो भी ट्रेनिंग देते है वह उसे बखूबी पूरा करते है चाहे आप उनसे किसी भी प्रकार के कार्य करा ले। इससे मशीनों को चलाने के लिए इंसानों की जरूरत नहीं के बराबर होती है। आपको रिजल्ट भी बेहतर मिलते है।

शुरुआत में वैज्ञानिको को मशीन लर्निंग पर कार्य करने में काफी बड़ी बड़ी समस्याएं आयी, क्योंकि मशीनें उतना करती है। जितना प्रोग्राम में सेट किया जाता है। मशीनें कोई और दूसरे तरीके भी नहीं समझती है।

इस समस्या का हल निकालने के लिए वैज्ञानिको ने डीप लर्निंग पर कार्य शुरू किया इसका सबसे बड़ा फायदा यह हुआ कि अब मशीनों को लिखित में जानकारी देने के अलावा पिक्चर दिखाकर या ऑडियो के माध्यम से भी ट्रेनिंग दी जा सकती है, लेकिन यह कार्य इतना आसान भी नहीं है जितना आपको लग रहा होगा।

आपको सुनने में यह तकनीक किसी हॉलीवुड की साइंस फिक्शन मूवी की तरह लग रही होगी जैसे कि हॉलीवुड की फ़िल्मो में दिखाया जाता है,लेकिन अब दुनिया में इस तकनीक पर तेजी से कार्य हो रहा है। जिससे इस तकनीक पर नई नई टेक्नोलॉजी विकसित हो रही है. दरअसल, मशीनों को आर्टिफिशियल न्यूरल नेटवर्क मॉडल को आधार बनाकर ट्रेनिंग दी जा रही है।

इस डीप लर्निंग तकनीक के माध्यम से ऐसी मशीनें विकसित की जा रही है , जो बच्चों की तरह दुनिया को देखती हैं। उन्हीं की तरह सीखती है, पढ़ती है, देखती है और सुनती भी है। और उसके बाद तय करती है कि क्या करना सही होगा। और क्या करने से नुकसान भी हो सकता है।

डीप लर्निंग कैसे कार्य करती है

मशीने किसी भाषा को समझती है और चीजों की पहचान कैसे करती है और कार्य कैसे करती है, लेकिन अगर उनके सामने समस्या आ जाये तो उसका निपटारा कैसे करेगी इसकी ट्रेनिंग भी मशीनों को दी जाती है।

इन्हे सिर्फ एक बार बताना पड़ता है। उसके बाद चीजों को खुद ही समझ लेती है कि क्या करना है और कैसे करना है। इसे भी जरूर पढे : हर किसी की निजी जानकारी निकालने वाला पेगासस स्पाइवेयर क्या है।

इस Deep Learning Technology के माध्यम से मशीने जो जैसा है उसे उसी रूप में लेती है। आसान भाषा में एक उदाहरण से समझते है जैसे कि अमेरिका में जन्मा बच्चा वहां की भाषा और रहन-सहन के तौर-तरीके सीखता है और भारत में जन्मा बच्चा भारत के।

अब आपके जेहन में ये बाते भी आ रही होगी कि क्या अब मशीने भी इंसानों की तरह सोच सकती है। ऐसा बिलकुल भी नहीं है। इंसानी दिमाग किसी चीज को भूल सकता है, लेकिन ये नहीं भूल सकती। इंसानी दिमाग के मुकाबले इसकी कोई लिमिट नहीं है, क्योंकि ये न तो यह थकती हैं और न ही बोरियत महसूस करती है।

यानि कि यह मशीनें 99% तक बिना भूले और बिना बोरियत महसूस किये बार-बार परफेक्ट काम कर सकती हैं। डीप लर्निंग एक्सपर्ट्स की राय के मुताबिक अब दुनिया को बड़े बदलाव के लिए तैयार हो जाना चाहिए, जहां पर अब आपको ज्यादातर काम मशीनें करती दिखेंगी।

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डीप लर्निंग का भविष्य

डीप लर्निंग तकनीक इंसानों की जिंदगी को पूरी तरह से बदलने वाली है | आप सोच भी नहीं सकते, कि इस तकनीक के माध्यम से कैसे कैसे कार्य को आसानी से किया जा सकता है।

जैसा कि आप सभी जानते है कि वर्तमान समय में दुनिया में कोरोना महामारी का प्रकोप फैला हुआ है | डॉक्टर्स अपनी जान पर खेलकर लोगो की जान बचाने में लगे हुए हैं। अब आप कल्पना कीजिए कि यदि इन डॉक्टर्स की जगह लोगो का इलाज करने के लिए मशीनें आ जाएं तो ? ये कैसा होगा ?

आपने देखा होगा कि जब आप सीटी स्कैन कराते है, तो डॉक्टर्स को रिपोर्ट को समझने-पढ़ने में काफी वक्त लग जाता है। और डॉक्टर्स को बीमारी की जड़ तक पहुंचने के लिए कई बार स्कैन और रिपोर्ट देखनी पड़ती है।

लेकिन डीप लर्निंग तकनीक की सहायता से मशीन शरीर को एक बार स्कैन करेगी और एक्यूरेसी के साथ बता देगी, कि आपके शरीर में कौन सी समस्या है, या कौन सी बीमारी है। इसके अलावा अगर मशीनों को सही ट्रेनिंग भी दी जाये तो वह संभावित बीमारी से बचने के तरीकों की जानकारी भी आपको दे सकती है।

मशीन लर्निंग और डीप लर्निंग एक्सपर्ट्स के मुताबिक यह तकनीक भविष्य में ग्रामीण क्षेत्रों में बड़ा बदलाव लाने वाली है। आपको पता भी नहीं चलेगा यह तकनीक ऐसा काम करेगी जिसकी किसी ने कल्पना भी नहीं करी होगी हर साल जमीन में उगने वाली हजारों हेक्टेयर फसलें सड़ जाती हैं।

इस तकनीक के माध्यम से किसान पत्नियों में छोटे-से बदलाव को भी पकड़ लेंगे और यह भी पता लगा सकेंगे कि फसल पर इसका क्या असर पड़ने वाला है।

फसल को बचाने के लिए आपको कब और क्या करना है इसकी जानकारी भी आपको इस तकनीक के माध्यम से मिल जाएगी। दक्षिण भारत में नारियल के पेड़ पर लगे नारियलों की गिनती का काम तो डीप लर्निंग वाली मशीनें सिर्फ फोटो देखकर कर देगी।

यह तो सिर्फ छोटा सा ट्रेलर है! अगर आप किसी दुकान पर डीप लर्निंग मशीन का इस्तेमाल करते है, तो वह आपको वह कुछ ही दिनों में यह बता देगी कि किस सामान को किस शेल्फ में रखने से उसकी बिक्री ज्यादा होती है।

कनाडा में नेता भी अब डीप लर्निंग की मदद ले रहे हैं ताकि भविष्य की राजनीति का रुख भांप सके। आपको लगेगा कि यह कोई ज्योतिष हैं तो आप गलत हैं। यह वही काम कर सकती है, जिसके लिए उसे ट्रेनिंग दी जाती है।

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डीप लर्निंग का मार्किट

वर्तमान समय को देखते हुए डीप लर्निंग का मार्किट तीन गुना तेजी से बढ़ रहा है। डेटा एनालिटिक्स फर्म ARK ने Big Ideas 2020 रिपोर्ट बनाई है।

जिसके मुताबिक डीप लर्निंग का मार्केट इंटरनेट की तुलना में 3 गुना तेजी से बढ़ रहा है। आने वाले 20 वर्षो में इस इंडस्ट्री का मार्किट 30 ट्रिलियन डॉलर यानी 2220 लाख करोड़ रुपए से भी ज्यादा का होगा।

अगर हम बात करे तो तो Deep Learning , Artificial Intelligence का ही एक हिस्सा है। जिसका आविष्कार पिछले 70 वर्षो पहले हो चुका है, लेकिन अब अचानक से आई तेजी की दो वजहें हैं। पहली- क्लाउड स्टोरेज आने से भारी-भरकम डेटा को संभालने की सुविधा, दूसरी- GPU.

विदेशों में डीप लर्निंग तकनीक का इस्तेमाल

फ्रंटलाइन कम्पनी द्वारा मशीन लर्निंग सिस्टम और डीप लर्निंग पर एक डॉक्यूमेंटरी फिल्म ‘In The Age Of AI’ बनाई गई। इस डॉक्यूमेंटरी में बताया गया है कि , मशीन लर्निंग और डीप लर्निंग कार्य को किस प्रकार से आसान बना देंगे।

इस डॉक्यूमेंटरी में चीन और सऊदी अरब में बिना किसी ड्राइवर के ट्रकों और कारों को चलता हुआ भी दिखाया गया है। फैक्ट्रियों में काम कर रहे ये ट्रक ऑटो ड्राइव मोड में रहते हैं। लेकिन अब दुबई में तो ऑटो ड्राइव कारें भी आ गई हैं।

डीप लर्निंग के प्रोडक्ट बनाने वाली कंपनी का कहना है कि अमेरिका और यूरोप में डीप लर्निंग का ज्यादा इस्तेमाल हेल्थ सेक्टर में हो रहा है। हेल्थ में भी मेंटल हेल्थ में सबसे ज्यादा।

दक्षिण अफ्रीका में जानवरों के दूध उत्पादन बढ़ाने के लिए इंजेक्शन लगानी की आवश्यकता नहीं होती है | वहां पर भी डीप लर्निंग मशीनों की मदद ली जाती है।

प्रेग्नेंसी में ही दूध का उत्पादन बढ़ाने से जुड़ी जानकारी जुटा ली जाती है। वहां तो किसान भी कृषि की पैदावार बढ़ाने के लिए डीप लर्निंग का इस्तेमाल कर रहे हैं। इससे उन्हें पता चल जाता है , कि किस समय पर सिंचाई करना चाहिए और कब कितनी खाद डालनी है।

दुनिया में हवाई जहाज़ों को चलाने के सबसे महत्वपूर्ण भूमिका कम्प्यूटर की रहती है। कौन-सा हवाई जहाज़ कब, और किस रास्ते से गुजरेगा, इसके अलावा यात्रियों के सामान को बाहर लाने तक का निर्देश मशीनें देती हैं।

ऐसे में एयर ट्रैफिक को कंट्रोल करने के लिए भी डीप लर्निंग का इस्तेमाल किया जा रहा है। किसी बेहद जटिल सिस्टम को चलाने, नई दवा तैयार करने, नए केमिकल तलाशने, माइनिंग से लेकर स्पेस रिसर्च और शेयर मार्केट के लिए एक्यूरेट अनुमान लगाने में भी डीप लर्निंग मशीनें ही मदद कर रही हैं।

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भारत में डीप लर्निंग तकनीक

देश में नोट बंदी के बाद दृष्टिहीनों ( बिना आँख वाले ) को नए 500-2000 के नोट छूकर अंदाजा लगाना काफी मुश्किल हो रहा था।

तब अयान निगम की कंपनी डीपआईऑटिक्स ने ‘माई आइज’ नाम का एक मोबाइल एप्लिकेशन लॉच की , इस ऍप्लिकेशन की सहायता से आप किसी भी नोट के बारे में पता लगा सकते है कि ये नोट कितने का है।

इस अलावा आप इस ऐप की सहायता से यह भी पता लगा सकते है कि आपके रास्ते में कौन चीजें है इस ऐप को बनाने ने भी कम्पनी डीप लर्निंग सिस्टम का इस्तेमाल किया है।

डीपआईऑटिक्स कम्पनी ने कोविड-19 के लिए भी एक एक्सरे एप्लिकेशन तैयार की है। ये एप्लिकेशन एक्सरे, टेंपरेचर, ऑक्सीजन देखकर निमोनिया और कोविड में फर्क बता देता है।

महाराष्ट्र सरकार ने इसका ऐप्लिकेशन का इस्तेमाल भी किया है। यही नहीं देश में अब हेल्थ, फाइनेंस, बैंकिंग, साइबर सिक्योरिटी, एग्रीकल्चरक्षेत्र की मल्टीनेशनल कंपनियां डीप लर्निंग मशीनों का इस्तेमाल कर रही हैं।

भारत में Deep Learning Technology अभी तक केवल मोबाइल एप्लिकेशन तक ही सीमित रहा है। लेकिन बीते कुछ वर्षो में डीप लर्निंग को लेकर कुछ स्टार्टअप शुरू हुए हैं,

लेकिन भारत में अभी डीप लर्निंग तकनीक की सहायता से कोई ऐसा प्रोडक्ट नहीं बना है। जिसे हम पूरी दुनिया को दिखा सके।

कंस्ट्रक्शन के क्षेत्र में ट्रैसकॉस्ट, बैंकिंग क्षेत्र में एसएलके ग्लोबल जैसी कंपनियां तेजी से उभर रही हैं। आने कुछ वर्षो में आपको दुनिया के स्तर पर बहुत से भारतीय प्रोडक्ट्स के नाम सुनाई देंगे।

गूगल के सीईओ सुंदर पिचाई के अनुसार , बिजली के इस्तेमाल, कैंसर का इलाज, जलवायु परिवर्तन से जुड़ी समस्याओं को दूर करने के लिए डीप लर्निंग तकनीक को तेजी से बढ़ावा मिल रहा है।

लेकिन यह बात भी सत्य है कि यदि हमने इसके जोखिम से बचने के तरीके नहीं खोजे तो आने वाले समय में इसके गंभीर परिणाम भी देखने को मिल सकते है।

फ्रंटलाइन की डॉक्यूमेंट्री यह जानकारी भी दी गई है कि इस तकनीक की वजह से चीन में लाखों लोगों की नौकरी जा चुकी है। उनकी जगह अब चीनी फैक्ट्रियों में मशीनें काम कर रही हैं।

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निष्कर्ष- Deep Learning Kya Hai

इस लेख में हमने आपको मशीने लर्निंग से जुडी एक टेक्नोलॉजी के बारे में सम्पूर्ण जानकरी दी है ताकि आपको भी इसके बारे में पता चल सकते है कि आने भविष्य में इस तकनीक की वजह से आपको दुनिया में किस प्रकार के बदलाव देखने को मिलेंगे।

इस लेख में हमने आपको बताया है कि डीप लर्निंग तकनीक क्या है ,( Deep Learning Kya Hai ) अगर आपको ये जानकारी पसंद आई हो तो आप अपनी राय हमे कमेंट बॉक्स में भी बता सकते है, लेकिन

अगर इस जानकारी को लेकर आपका किसी प्रकार का सवाल है तो आप कमेंट में पूछ सकते है और इस जानकारी को दुसरो के साथ भी शेयर करे ताकि सभी को भविष्य की इस तकनीक के बारे में सही जानकारी मिल सके

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